Friday, 1 February 2013

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प्राची के मुख की अरुण ज्योति
यह भगवा ध्वज फहरे
यह भगवा ध्वज फहरे

यह वहिन-शिखा का वेश किये
गत वैभव का संदेश लिये
हिन्दु संस्कृति का अचल रुप
यह भगवा ध्वज फहरे
यह भगवा ध्वज फहरे॥१॥

भारत माता का उच्च भाल-
आर्यों के उर की अग्नि-ज्वाल
इस राष्ट्रभक्ति का अमर चिह् न
यह भगवा ध्वज फहरे
यह भगवा ध्वज फहरे॥२॥

यह चन्द्रगुप्त कर की कृपाण
विक्रमादित्य का शिरस्त्राण
इस आर्य देश का कठिन कवच
यह भगवा ध्वज फहरे
यह भगवा ध्वज फहरे॥३॥

बप्पा रावल की शान यही
चौहान नृपति का मान यही
राणा के त्यागों का प्रतीक
यह भगवा ध्वज फहरे
यह भगवा ध्वज फहरे॥४॥

वन्दा गुरु के बलिदानों से
रक्षित छत्ता के प्राणों से
नीतिज्ञ शिवा का विजय केतु
यह भगवा ध्वज फहरे
यह भगवा ध्वज फहरे॥५॥

दुर्बल विजितों की शक्ति प्रबल
उत्थान मार्ग क यह सम्बल
पथ-भ्रष्ट जति क ध्रुवतार
यह भगवा ध्वज फहरे
यह भगवा ध्वज फहरे॥६॥

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