Thursday, 31 October 2013

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  • सबूत के साथ ये पोस्ट पढ़िए !!

    ३० अक्तूबर १९९० में मुलायम सिंह यादव ने पुलिस को आदेश दिया था की अयोध्या में जितने भी राम भक्त इकठ्ठा हुए है उन सब पर गोलियां बरसाई जाये |
    बस फिर क्या था, पुलिस ने दौड़ा दौड़ा कर , घरों के छज्जों से हर तरफ से सैंकड़ों राम भक्तो पर गोलियां बरसाई और लाशो के ढेर लगा दिए |
    बाद में उन लाशों को ट्रकों में भरकर रेत की बोरी बांधकर सरयू नदी में फेक दी |...

    उन रामभक्तों ने कोई तोड़फोड़ नहीं की थी ना किसी को नुक्सान पहुचाया था |
    उनका कसूर बस इतना था की वो अपने ही देश में अपने राम की जन्मभूमि में राम मंदिर की मांग कर रहे थे |

    सबूत -

    1) https://www.youtube.com/watch?v=2sPFz2JsFHg
    2) https://www.youtube.com/watch?v=iSmb826fGLc

    इस पोस्ट को अपने मित्रों तक पहुचाओ ताकि सबको पता चले की मुलायम सिंह यादव कितना नीच इंसान है और हिन्दुओं का दुश्मन है |

    एडमिन - संजय
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Saturday, 19 October 2013

दाँतों में से खून निकलता हो तो (PYORRHOEA) -----------

दाँतों में से खून निकलता हो तो (PYORRHOEA) -----------
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* नीबूं का रस मसूड़ों को रगड़ने से आराम होगा ।


कपूर:

पायरिया होने पर कपूर का टुकड़ा पान में रखकर खूब चबाने और लार एवं रस को बाहर निकालने से पायरिया रोग खत्म होता है।
देशी घी में कपूर मिलाकर प्रतिदिन 3 से 4 बार दांत व मसूढ़ों पर धीरे-धीरे मलने और लार को बाहर निकालने से पायरिया रोग ठीक होता है।

सरसों का तेल:

60 मिलीलीटर सरसों के तेल में लहसुन पीसकर गर्म करके इसमें 30 ग्राम भुनी हुई अजवायन और 15 ग्राम सेंधानमक मिलाकर मंजन करें। इससे प्रतिदिन मंजन करने से दांतों के सभी रोग ठीक होते हैं। 2 से 3 महीने इसका प्रयोग करने से पायरिया ठीक होता है।


फिटकरी:

10 ग्राम नमक और 20 ग्राम फिटकरी बारीक पीसकर मसूढ़ों पर दिन 3 बार मलने और 1 गिलास गर्म पानी में 5 ग्राम फिटकरी मिलाकर कुल्ला करने से मसूढ़े व दांत मजबूत होते हैं। इससे मसूढ़ों की सूजन, दांतों का दर्द, खून व मवाद निकलना आदि ठीक होता है।

लौंग :

5 से 6 बूंद गर्म पानी में लौंग का तेल 1 गिलास गर्म पानी में मिलाकर प्रतिदिन गरारे व कुल्ला करने से पायरिया रोग नष्ट होता है।

दाँतों को मजबूत बनाने के लिए

* महीने में २-३ बार रात को सोते समय जरा सा नमक और सरसों का तेल मिलकर दाँतों को रगड़ दे ।

* देशी गाय का गौमूत्र ३-४ बार कपड़े से छान कर कोई मुंह में भरे और अच्छी तरह कुल्ला करें फिर थूक दे ... फिर भरे ...ऐसा ४-५ बार करें ....फिर साफ पानी से मुंह धो लें | उस आदमी को कभी dentist के पास नहीं जाना पड़ेगा | बुढ़ापे में भी दांत मजबूत रहेंगे | चौखट नहीं लगवानी पड़ेगी |

दांतों के लिए
दातौन के अतिरिक्त दंतमंजन का भी उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए सोंठ, काली मिर्च, पीपर, हरड़, बहेड़ा, आँवला, दालचीनी, तेजपत्र तथा इलायची के समभाग चूर्ण में थोड़ा-सा सेंधा नमक तथा तिल का तेल मिलाकर 'दंतशोधक पेस्ट' बनायें। कोमल कुर्विका से अथवा प्रथम उँगली से मसूड़ों को नुकसान पहुँचाये बिना दाँतों पर घिसें। इससे मुख की दुर्गन्ध, मैल तथा कफ निकल जाते हैं एवं मुख में निर्मलता, अन्न में रूचि तथा मन में प्रसन्नता आती है।
दंतधावन के उपरान्त जिह्वा निर्लेखनी से जिह्वा साफ करनी चाहिए। इसके लिए दातौन के दो भाग करके एक भाग का उपयोग करें।
दिन में दो बार दंतधावन करें। भोजन के बाद तथा किसी भी खाद्य-पेय पदार्थ के सेवन के बाद दाँतों व जिह्वा की सफाई अवश्य करनी चाहिए।

गण्डूष धारण (कुल्ले करना)- द्रव्यों को मुख में कुछ समय रखकर निकाल देने को गण्डूष धारण करना कहते हैं। त्रिफला चूर्ण रात को पानी में भिगो दें। सुबह छानकर इस पानी से कुल्ला करें। दंतधावन के बाद गण्डूष धारण करने से अरूचि, दुर्गन्ध, मसूड़ों की कमजोरी दूर होती है। मुँह में हलकापन आता है। गुनगुने तिल तेल से गण्डूष धारण करने से स्वर स्निग्ध होता है। दाँत व मसूड़े वृद्धावस्था तक मजबूत बने रहते हैं। वृद्धावस्था में भी दाँत देर से गिरते हैं।

देशभक्‍त डॉ. नारायण दामोदर सावरकर पुण्यतिथी..

विनम्र अभिवादन !
देशभक्‍त डॉ. नारायण दामोदर सावरकर पुण्यतिथी..
`क्रांतीवीर बाबाराव सावरकर' या चरित्रग्रंथात म्हणतात, नारायणराव अर्भक असतांना मातेच्या ममतेने आणि पित्याच्या प्रेमळपणाने बाबांनी त्यांचे संगोपन केले. आपल्या तात्याप्रमाणे आपला बाळही देशभक्‍त व्हावा, म्हणून ते नारायणरावांचे शिक्षण मोठ्या आशेने करत. त्यांची ती आशा नारायणरावांनी इंग्रजी तिसरीत गेल्यापासूनच पुरी करण्यास प्रारंभ केला. बाबा-तात्यांपासून त्यांनी जी स्फूर्ती घेतली तिच्या बळावर त्यांनी `मित्रसमाज' या विद्यार्थी संघटनेचा व्याप उभा केला आणि तो समर्थपणे सांभाळून क्रांतीकक्षेत कितीतरी तरुण आणून सोडले. आपल्या स्फूर्तीप्रद वक्‍तृत्वावर ते विद्यार्थीदशेपासून तरुणांना मोहवत आणि थोरांकडून वाहवा मिळवत.

त्यांच्याविषयी माहिती वाचण्यासाठी पहा : http://balsanskar.com/marathi/lekh/38.html
हिंदी के लिए पढे : http://balsanskar.com/hindi/lekh/38.html

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जापान में किराए पर किसी मुस्लिम को घर मिलेगा, इसकी तो कल्पना भी नहीं की जा सकती है।जापान में किराए पर किसी मुस्लिम को घर मिलेगा, इसकी तो कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

जापान में किराए पर किसी मुस्लिम को घर मिलेगा, इसकी तो कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
यदि किसी जापानी को उसके पड़ोस के मकान में अमुक मुस्लिम के किराये पर रहने की खबर मिले तो सारा मोहल्ला सतर्क हो जाता है।•
जापान में कोई इस्लामी या अरबी मदरसा नहीं खोल सकता है।
मतांतरण पर रोक•
जापान में मतान्तरण पर सख्त पाबंदी है।•
किसी जापानी ने अपना पंथ किसी कारणवश बदल लिया है तो उसे और साथ ही मतान्तरण कराने वाले को सख्त सजा दी जाती है।•
यदि किसी विदेशी ने यह हरकत की होती है उसे सरकार कुछ ही घंटों में जापान छोड़कर चले जाने का सख्त आदेश देती है।•
यहां तक कि जिन ईसाई मिशनरियों का हर जगह असर है, वे जापान में दिखाई नहीं देतीं।
वेटिकन के पोप को दो बातों का बड़ा अफसोस होता है। एक तो यह कि वे 20वीं शताब्दी समाप्त होने के बावजूद भारत को यूनान की तरह ईसाई देश नहीं बना सके। दूसरा यह कि जापान में ईसाइयों की संख्या में वृध्दि नहीं हो सकी।
•जापानी चंद सिक्कों के लालच में अपने पंथ का सौदा नहीं करते। बड़ी से बड़ी सुविधा का लालच दिया जाए तब भी वे अपने पंथ के साथ धोखा नहीं करते हैं।•
जापान में 'पर्सनल ला' जैसा कोई शगूफा नहीं है। यदि कोई जापानी महिला किसी मुस्लिम से विवाह कर लेती है तो उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया जाता है। जापानियों को इसकी तनिक भी चिंता नहीं है कि कोई उनके बारे में क्या सोचता है। तोकियो विश्वविद्यालय के विदेशी अध्ययन विभाग के अध्यक्ष कोमिको यागी के अनुसार, इस्लाम के प्रति जापान में हमेशा यही मान्यता रही है कि वह एक संकीर्ण सोच का मजहब है। उसमें समन्वय की गुंजाइश नहीं है।
स्वतंत्र पत्रकार मोहम्मद जुबेर ने 9/11 की घटना के पश्चात अनेक देशों की यात्रा की थी। वह जापान भी गए, लेकिन वहां जाकर उन्होंने देखा कि जापानियों को इस बात पर पूरा भरोसा है कि कोई आतंकवादी उनके यहां पर भी नहीं मार सकता।

सीआईए (CIA) की गुप्त हत्या का हथियार “हार्ट अटैक गन”, 1975


सीआईए (CIA) की गुप्त हत्या का हथियार “हार्ट अटैक गन”, 1975 मे सार्वजनिक किया गया था |

गुप्त हत्या के लिए उपयोग किया जाने वाला सीआईए का हथियार एक छोटा सा जहरिला भाला जैसा गोली मारता है जिससे दिल का दौरा पड़ता है, नीचे दिए छोटे वीडियो में काँग्रेशनल गवाही में यह विस्तार से बताया गया है | अपने आप को और इस तरह के महत्वपूर्ण मामलों पर दूसरों को शिक्षित करके, हम सब के लिए एक उज्जवल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं |

इस गुप्त सीआईए हथियार से भाला कपड़ों की परत मे भी घुसता है और त्वचा पर कुछ भी नहीं लेकिन एक छोटे लाल डॉट छोड़ता हैं | घातक खुद्र भाला के प्रवेश पर, हत्या के लिए लक्षित व्यक्ति अत्यधिक एक मच्छर काटने जैसा महसूस कर सकते हैं, या वे कुछ भी महसूस नहीं कर सकता | जहरीला भाला लक्ष्य में प्रवेश करने पर पूरी तरह से विखंडित हो जाता है |

घातक जहर तब तेजी से खून में प्रवेश करती है और दिल का दौरा पड़ने का कारण बनती है | काम हो जाने पर विष जल्दी विकृत हो जाता है, जिससे शव परीक्षा के समय दिल का दौरा प्राकृतिक कारणों के अलावा और कुछ से हुई कि नही पता लगाने के लिए बहुत संभावना नहीं होता |

सीआईए के इस गुप्त हथियार के बारे में आश्चर्यजनक जानकारी सीआईए के दुष्ट गतिविधियों पर 1975 में अमेरिकी सीनेट गवाही से आता है |
अधिक जानकारी के लिए यह विडियो देखे:
http://www.youtube.com/watch?feature=player_embedded&v=LwuVZUPYC2k
Like · · · October 17 at 11:59am ·
मे सार्वजनिक किया गया था |

प्राचीनतम सफल ब्रेन सर्जरी | World’s Oldest Successful Brain Surgery discovered in India : 4300 BC*

प्राचीनतम सफल ब्रेन सर्जरी | World’s Oldest Successful Brain Surgery discovered in India : 4300 BC*


http://www.vedicbharat.com/2013/05/Worlds-Oldest-Successful-Brain-Surgery-discovered-in-India-4300BC.html

भारत में प्राचीन हड़प्पा सभ्यता की खुदाई से एक लगभग 4300 ई० पू० वर्ष पुरानी मानव खोपड़ी प्राप्त हुई है जो दुनिया की सबसे पुरानी (ज्ञात) सफल मानव मस्तिष्क सर्जरी को दर्शाती है .
यह खोज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने की है । इस खोपड़ी का अध्याय करने से ज्ञात हुआ की यह अब तक की ज्ञात सर्वाधिक प्राचीन नर खोपड़ी है जिसका ऑपरेशन खोपड़ी में ड्रिल मशीन द्वारा छेद कर किया गया और ये ऑपरेशन पूर्णतया सफल भी रहा ।

Scientists have discovered the world’s oldest known case of a successful human brain surgery after unearthing a 4300 year old skull from the site of the ancient Harappan Civilization site in India. This discovery was done by the scientists from the Archaeological Survey of India (ASI) who found evidence pointing this to be the oldest known case of Trephination in the world meant to treat a skull injury.

इस प्रकार की सर्जरी को Trephination कहा जाता है । जब किसी व्यक्ति के मस्तिष्क में भयंकर चोट लगती है जो मस्तिष्क/खोपड़ी के अंदरूनी भागो में हड्डी चटक जाया करती है इन्ही मस्तिष्क में बिखरी हड्डियों के चूरे आदि को मस्तिष्क से बहार निकलने की प्रक्रिया को Trephination कहा जाता है जिसमे खोपड़ी के एक छोटे से हिस्से में छेद कर ये ऑपरेशन किया जाता है ।

Trephination is the process of drilling holes in the damaged skull to remove shattered bits of bone from a fractured skull and clean out the blood that often pools under the skull after a blow to the head.

The 4,300 year old Skull which underwent brain surgery. Image Courtesy: Current Science
इसके अतिरिक्त कुछ दशकों पूर्व भी दुनिया के तथा भारत के कई स्थानों पर इस प्रकार के अवशेष प्राप्त हुए जिससे ये स्पष्ट होता है की प्राचीन भारत में निश्चय ही सफल ऑपरेशन किये जाते थे ।
किन्तु उन सभी में से ये खोज सबसे अधिक ठोस व् पुख्ता प्रमाण देती है ।
वैज्ञानिकों के अनुसार इसका अध्ययन करने पता चलता है की ये व्यक्ति किसी जबरदस्त आघात का शिकार बना था, छेद की आंतरिक सीमा की 3 मिमी चौड़ाई सावधानीपूर्वक किये गये ऑपरेशन को दर्शाती है, ऑपरेशन के पश्चात यह व्यक्ति स्वस्थ होकर काफी समय तक जीवित भी रहा ।

A clear rim of 3mm width at the internal border of the hole is the evidence of osteogenesis or healing , indicating that the victim survived for a considerable time after the operation .



http://www.currentscience.ac.in/Volumes/100/11/1621.pdf
http://www.academia.edu/1191412/Evidence_of_surgery_in_ancient_India_Trepanation_at_Burzahom_Kashmir_over_4000_years_ago (Detailed)


TIME TO BACK TO VEDAS
वेदों की ओर लौटो ।


सत्यम् शिवम् सुन्दरम्

http://www.vedicbharat.com/2013/05/Worlds-Oldest-Successful-Brain-Surgery-discovered-in-India-4300BC.html

आजाद मैदान दंगे का नंगा सच – दंगे का पूरा वीडियो

सरकार इस वीडियो पर प्रतिबंध लगाए उससे पहले देख लीजिये ये वीडियो
आजाद मैदान दंगे का नंगा सच – दंगे का पूरा वीडियो

मुंबई के आज़ाद मैदान के दंगो की तस्वीरे ओर वीडियो किसी भी मीडिया ने नहीं दिखाई थी क्यू की उसमे भारत सरकार जिसे शांति दूत या शांति का संदेश देनेवाली जनता कहेती है उसके द्वारा किए गए कुछ काले काम और गंदे अलफाज भी थे

ये जनता को राष्ट्रप्रेम नहीं है मगर जिस देश का खाती है उसी देश को खत्म करने पर तुली हुई है , क्या इस देश मे पाकिस्तान के झंडे लहेराना गुनाह नहीं है ? ओर आप इस वीडियो को देखिये कितने गंदे अलफाज ये लोगो के मुंह से निकल रहे है ..... क्या ये लोगो को देश से प्यार नहीं है ? ओर इसे देखकर क्या आप अब भी कहेंगे की ये शांति सन्देस देनेवाली प्रजा है ?

इस हादसे मे सैनिक स्मारक को तोडनेवाले लड़के के लिए खुद कांग्रेसी मंत्री ने कहा था की वो बच्चा तो बेगुनाह है ....निर्दोष है ..??
......................क्या बेगुनाह ओर निर्दोष लोग कांग्रेस की नजर मे ऐसे होते है ?
https://www.facebook.com/photo.php?v=464972350284678&set=vb.528779110529053&type=2&theater
जी हिंदूवादी पेज कांग्रेस के इशारों पर मोदी को कोस रहे थे की मोदी के राज में गाय कट रही है ।
ये उन लोगो के लिए जवाब है की अगर किसी ने गुजरात में कानून तोडा भी है तो गुजरात सरकार उसे छोडती नहीं ।

ख़बरों की कुछ लिंक निचे है >

1) http://www.indianexpress.com/news/cops-arrest-4-for-slaughtering-cows-locals-attack-police-snatch-revolver/1183694/

2) http://www.indianexpress.com/news/clashes-over-cow-slaughter-3-more-caught/1184086/

3) http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2013-10-17/vadodara/43142951_1_6-cops-gujarat-village-three-cops

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बिन बेटी ये मन बेकल है, बेटी है तो ही कल है, poem

बिन बेटी ये मन बेकल है, बेटी है तो ही कल है,
बेटी से संसार सुनहरा, बिन बेटी क्या पाओगे?

बेटी नयनों की ज्योति है, सपनों की अंतरज्योति है,
शक्तिस्वरूपा बिन किस देहरी-द्वारे दीप जलाओगे?

शांति-क्रांति-समृद्धि-वृद्धि-श्री सिद्धि सभी कुछ है उनसे,
उनसे नजर चुराओगे तो किसका मान बढ़ाओगे ?

सहगल-रफ़ी-किशोर-मुकेश और मन्ना दा के दीवानों!
बेटी नहीं बचाओगे तो लता कहां से लाओगे ?

अब भी जागो, सुर में रागो, भारत मां की संतानों!
बिन बेटी के, बेटे वालों, किससे ब्याह रचाओगे?

बहन न होगी, तिलक न होगा, किसके वीर कहलाओगे?
सिर आंचल की छांह न होगी, मां का दूध लजाओगे।

चीन - भारत 1962 के युद्ध की कहानी !

चीन - भारत 1962 के युद्ध की कहानी !
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..1966.. के पाकिस्तान के भारत पर होने वाले हमले से पूर्व चीन ने भारत पर हमला किया था 1962 ने !
और ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हमला था ! इसको इसलिए दुर्भाग्यपूर्ण माना जाता है कि उस समय vk krishna menon जैसा नेता भारत का रक्षा मंत्री था !!

दुर्भाग्यपूर्ण वाली बात ये है कि VK krishan menon थे तो भारत के रक्षा मंत्री लेकिन हमेशा विदेश घूमते रहते थे ! उनको हिदुस्तान रहना अच्छा ही नहीं लगता था आमेरिका अच्छा लगता था !फ्रांस अच्छा लगता था !ब्रिटेन अच्छा लगता था ! नुयोर्क उनको हमेशा अच्छा लगता था ! उनकी तो मजबूरी थी कि भारत मे पैदा हो गए थे ! लेकिन हमेशा उनको विदेश रहना और वहाँ घूमना ही अच्छा लगता था ! और जो काम उनको रक्षा मंत्री का सौंपा गया था उसको छोड़ वो बाकी सब काम करते थे ! विदेश मे घूमते रहना !कभी किसी देश कभी किसी देश मे जाकर कूट नीति ब्यान दे देना ! !

और ये किस तरह के अजीब किसम के आदमी थे !आप इस बात से अंदाजा लगा सकते है ! 1960 -61 मे एक बार संसद मे बहस हो रही थी तो वीके कृशन ने खड़े होकर अपनी तरफ से एक प्रस्ताव रखा !

प्रस्ताव क्या रखा ??

उन्होने कहा देखो जी पाकिस्तान ने तो 1948 मे हमसे समझोता कर लिया कि वह आगे से कभी हम पर हमला नहीं करेगा ! और दुनिया के आजू-बाजू मे और कोई हमारा दुश्मन है नहीं ! तो हमे बार्डर पर सेना रखने कि क्या जरूरत है सेना हटा देनी चाहिए ! ऐसे उल्टी बुद्धि के आदमी थे vk krishan menon ! और ये बात वो कहीं साधारण सी बैठक मे नहीं लोकसभा मे खड़े होकर बोल रहे थे ! कि ये सेना हमको हटा देनी चाहिए ! इसकी जरूरत नहीं है !!

तो कुछ सांसदो मे सवाल किया कि अगर भविष्य मे किसी देश ने हमला कर दिया तो कया करेंगे ???? अभी तो आप बोल रहे है कि सेना हटा लो ! पर अमरजनसी जरूरत पड़ गई तो कया करेंगे ???
तो उन्होने ने कहा इसके लिए पुलिस काफी है ! उसी से काम चला लेगे ! ऐसा जवाब vk krishann manon ने दिया !!

ऐसी ही एक बार कैबनेट कि मीटिंग थी प्रधान मंत्री और बाकी कुछ मंत्री माजूद थे ! vk kirshan ने एक प्रस्ताव फिर लाया और कहा ! देखो जी हमने सीमा से सेना तो हटा ली है ! अगर सेना नहीं रखनी तो पैसे खर्च करने कि क्या जरूरत है ! तो बजट मे से सेना का खर्च भी कम कर दिया !

और तो और एक और मूर्खता वाला काम किया ! उन्होने कहा अगर सेना ही नहीं है तो ये बंब,बंदुके
बनाने की क्या जरूरत है ! तो गोला बारूद बनाने वाले कारखानो मे उत्पादन पर रोक लगा दी और वहाँ काफी बनाने के प्याले चाय बनाने के प्याले आदि का काम शुरू करवा दिया !!

और उनको जो इस तरह के बयान आते थे तो चीन को लगा कि ये तो बहुत मूर्ख आदमी है ! कहता है सेना को हटा लो ! सेना का खर्चा कम कर दो ! गोला बारूद बनाना बंद कर दो ! और खुद दुनिया भर मे घूमता रहता है ! कभी सेना के लोगो के पास न जाना ! सेना के साथ को meeting न करना ! इस तरह के काम करते रहते थे !

तो चीन को मौका मिल गया ! और चीन एक मौका ये भी मिल गया !चीन को लगा की vk kirashan तो प्रधानमंत्री (नेहरू ) के आदमी है !! तो शायद नेहरू की भी यही मान्यता होगी ! क्यूंकि vk krishan नेहरू का खास दोस्त था तो नेहरू ने उसको रक्षा मंत्री बना दिया था ! वरना vk krishan कोई बड़ा नेता नहीं था देशा का ! जनता मे कोई उनका प्रभाव नहीं था ! बस नेहरू की दोस्ती ने उनको रक्षा मंत्री बना दिया !!

और वो हमेशा जो भाषण देते थे !लंबा भाषण देते थे 3 घंटे 4 घंटे ! लेकिन आप उनके भाषण का सिर पैर नहीं निकाल सकते थे कि उन्होने बोला क्या ! ऐसे मूर्ख व्यक्ति थे vk krishan menon !

तो ये सब मूर्खता देख कर चीन ने भारत पर हमला किया और भारत का एक इलाका था aksai chin !
वहाँ चीन ने पूरी ताकत से हमला किया ! और हालात क्या थे आप जानते है ! सेना को वापिस बुला लिया था पहले ही !! सेना का बजट कम था ! गोला बारूद के कारखाने बंद थे !! तो चीनी सैनिको ने बहुत मनमानी कि उस askai chin के क्षेत्र मे !!

और जो सबसे बुरा काम किया ! चीनी सैनिको ने सैंकड़ों महिलाओ के साथ जमकर बलत्कार किए !! वहाँ हजारो युवको कि ह्त्या करी ! askai chin का जो इलाका है वहाँ सुविधाए कुछ ऐसे है कि लोग वैसे ही अपना जीवन मुश्किल से जी पाते है ! रोज का जीवन चलाना ही उनको लिए किसी युद्ध से कम नहीं होता ऊपर से चीन का हमला !!

तो वहाँ के लोगो ने उस समय बहुत बहुत दुख झेला ! और वहाँ हमारी सेना नहीं थी ! तो वहाँ लोगो के मन हमारी सरकार के विरुद्ध एक विद्रोह की भावना उतपन हुई ! और वो आज भी झलकती है ! आज भी आप वहाँ जाये तो वहाँ लोग ये सवाल करते है कि जब चीन ने हमला किया था तो आपकी सेना कहाँ थी ! और सच है हम लोगो के पास इसका कोई जवाब नहीं ! तो उनमे एक अलगाव कि भावना उतपन हुई जो अलग क्षेत्र की मांग करने लगे !!!

तो हमले मे चीन ने हमारी 72 हजार वर्ग मील जमीन पर कब्जा कर लिया ! और हमारा तीर्थ स्थान कैलाश मानसरोवर भी चीन के कब्जे मे चला गया ! और बहुत शर्म कि बात है आज हमे अपने तीर्थ स्थान पर जाने के लिए चीन से आज्ञा लेनी पड़ती है ! और इसके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ नेहरू और vk krishan menon जैसे घटिया और मूर्ख किसम के नेता थे !!!
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तो युद्ध के बाद एक बार संसद मे भारत-चीन युद्ध पर चर्चा हुई ! सभी सांसदो के मुह से जो एक स्वर सुनाई दे रहा था ! वो यही था !कि किसी भी तरह चीन के पास गई 72 हजार वर्ग मील जमीन और हमारा तीर्थ स्थान कैलाश मानसरोवर वापिस आना चाहिए !

महावीर त्यागी जी जो उस समय के बहुत महान नेता थे !उन्होने ने सीधा नेहरू को कहा कि आप ही थे जिनहोने सेना हटाई ! सेना का बजट कम किया ! गोला बारूद बनाने के कारखाने बंद करवाये! आप ही के लोग विदेशो मे घूमा करते थे ! और आपकी इन गलितयो ने चीन को मौका मिला और उसमे हमला किया और हमारी 72 हजार वर्ग मील जमीन पर कब्जा कर लिया !!

अब आप ही बताए कि आप ये 72 हजार वर्ग मील जमीन को कब वापिस ला रहे है ?????!

तो इस हरामखोर नेहरू का जवाब सुनिए ! नेहरू ने कहा फिर क्या हुआ अगर वो जमीन चली गई ! चली गई तो चली गई ! वैसे भी बंजर जमीन थी घास का टुकड़ा नहीं उगता था ! ऐसी जमीन के लिए क्या चिंता करना !!

तो त्यागी जी ने बहुत ही बढ़िया जवाब दिया ! त्यागी जी ने कहा नेहरू जी उगता तो आपके सिर पर भी कुछ नहीं ! तो इसको भी काट कर चीन को देदो ! और इत्फ़ाक से नेहरू उस समय पूरी तरह गंजा हो चुका था !!

तो दोस्तो इस नेहरू ने धरती माँ को एक जमीन का टुकड़ा मान लिया ! और अपनी गलती मानने के बजाय ! उल्टा ब्यान दे रहा है जमीन चली गई तो चली गई !

इससे ज्यादा घटिया बात कुछ और नहीं हो सकती ! !

और लानत है भारत की जनता पर आज चीन युद्ध के 50 साल बाद भी नेहरू परिवार के वंशज देश चला रहे हैं !! हमे दिन रात लूट रहे हैं !हमे मूर्ख बना रेह हैं !
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आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !
अमर शहीद राजीव दीक्षित जी की जय !!

1962 का युद्ध सारी घटना यहाँ देखे !!
must click here !!

http://www.youtube.com/watch?v=S4390QXdYF4


वन्देमातरम !!!!

अमर शहीद Rajiv Dixit जी की जय !

why india lost war with china?? what was the biggest reason ?? Must watch to know !
youtube.com

केजरीवाल

ये देखिये अपने आप को इमानदार नेता कहने वाले केजरीवाल जी से जब
पाकिस्तान, आतंकवाद और मोदी जी के बारे में प्रशन पूछा गया तो वो
इंटरव्यू छोड़
छोड़ कर केसे भागा ..15 मिनट के बाद का विडियो देखे

http://www.youtube.com/watch?v=PEHKpmA8lEE

एक विशेष समुदाय के वोट पाने के लिए इमानदार नेता केजरीवाल जी ने
पाकिस्तान और आतंकवाद पर कोई जवाब नहीं दिया तो अब कहा गयी
उनकी ईमानदारी ...एसी ईमानदारी MY Foot ..देश से बड कर कुछ नहीं है

अपनी आंखे खोलो सिर्फ और सिर्फ मोदी और कमल का निशान याद रखो
मोदी जी जानते है किस से केसे काम करवाना है विश्वाश रखो

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video link

(http://www.youtube.com/watch?v=PEHKpmA8lEE)

Thursday, 26 September 2013

matra bhumi bharat

तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
जलवायु अन्न सुमधुर, फल फूल दायिनी माँ! धन धान्य सम्पदा सुख, गौरव प्रदायिनी माँ!!
शत-शत नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!

अति शुभ्र ज्योत्स्ना से, पुलकित सुयामिनी है। द्रुमदल लतादि कुसुमित, शोभा सुहावनी है।।
यह छवि स्वमन धरें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

कसकर कमर खड़े हैं, हम कोटि सुत तिहारे। क्या है मजाल कोई, दुश्मन तुझे निहारे।।
अरि-दल दमन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

तू ही हमारी विद्या, तू ही परम धरम है। तू ही हमारा मन है, तू ही वचन करम है।।
तेरा भजन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

तेरा मुकुट हिमालय, उर-माल यमुना-गंगा। तेरे चरण पखारे, उच्छल जलधि तरंगा।।
अर्पित सु-मन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

बैठा रखी है हमने, तेरी सु-मूर्ति मन में। फैला के हम रहेंगे, तेरा सु-यश भुवन में।।
गुंजित गगन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

पूजा या पन्थ कुछ हो, मानव हर-एक नर है। हैं भारतीय हम सब, भारत हमारा घर है।।
ऐसा मनन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

vande matram

तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
जलवायु अन्न सुमधुर, फल फूल दायिनी माँ! धन धान्य सम्पदा सुख, गौरव प्रदायिनी माँ!!
शत-शत नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!

अति शुभ्र ज्योत्स्ना से, पुलकित सुयामिनी है। द्रुमदल लतादि कुसुमित, शोभा सुहावनी है।।
यह छवि स्वमन धरें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

कसकर कमर खड़े हैं, हम कोटि सुत तिहारे। क्या है मजाल कोई, दुश्मन तुझे निहारे।।
अरि-दल दमन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

तू ही हमारी विद्या, तू ही परम धरम है। तू ही हमारा मन है, तू ही वचन करम है।।
तेरा भजन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

तेरा मुकुट हिमालय, उर-माल यमुना-गंगा। तेरे चरण पखारे, उच्छल जलधि तरंगा।।
अर्पित सु-मन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

बैठा रखी है हमने, तेरी सु-मूर्ति मन में। फैला के हम रहेंगे, तेरा सु-यश भुवन में।।
गुंजित गगन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

पूजा या पन्थ कुछ हो, मानव हर-एक नर है। हैं भारतीय हम सब, भारत हमारा घर है।।
ऐसा मनन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

political dovelopment

28. देश को विकास की राजनीति की जरूरत ।


वीडीयो पार्ट -1 ... http://www.youtube.com/watch?v=MaeJnR9zKug


वीडीयो पार्ट -2 ... http://www.youtube.com/watch?v=kgIum0EK_ik

hello hii

हाय-हेलो' से बड़ों का अपमान न करें......

आप अपने धर्म के अनुसार कुछ भी और शब्द बोल सकते है जैसे राम राम बोलिए राधे राधे बोलिए जय जिनेन्द्र बोलिए शत श्री आकाल बोलिए जै हिन्द - वंदेमातरम, जै भारत बोलिए

हमारी सनातन संस्कृति में माता-पिता तथा गुरूजनों को नित्य चरणस्पर्श करके प्रणाम करने का विधान है। चरणस्पर्श करके प्रणाम न कर सकें तो दोनों हाथ जोड़कर ही नमस्कार करें। कन्याओं को तो किसी भी पुरूष के पैर छूकर प्रणाम करना ही नहीं चाहिए। शास्त्रों में आता हैः

अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः। चत्वारि तस्य वर्द्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्।।

'जो नम्रताशील हैं तथा नित्य बड़ों की सेवा करता है उसके आयु, विद्या, यश एवं बल ये चारों बढ़ते हैं।'

हमारी संस्कृति में अभिवादन करना 'गुड मार्निंग', 'गुड इवनिंग' अथवा 'हेलो-हाय' की भाँति एक निरर्थक व्यापार नहीं है जिसमें लाभ तो कुछ होता नहीं अपितु व्यर्थ की वाणी नष्ट होती है और चंचलता आती है। मनु आदि महर्षियों ने हमारी संस्कृति की अभिवादन पद्धति के चार लाभ बताये हैं – आयुवृद्धि, विद्यावृद्धि, यशवृद्धि एवं बलवृद्धि। यही चार वस्तुएँ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के लिए आवश्यक हैं। अर्थात् बड़ों के चरणस्पर्श करने से पुरूषार्थ चातुष्टय साधने में सहायता मिलती है।

यह मात्र कल्पना नहीं अपितु एक ऐसा कठोर सत्य है जिसे स्वीकार करने के लिए आज का विज्ञान भी मजबूर हो गया है।

प्रत्येक मनुष्य के शरीर में धनात्मक एवं ऋणात्मक विद्युतधारायें सतत प्रवाहित होती रहती हैं। शरीर के दायें भाग में धनात्मक एवं बायें हिस्से में ऋणात्मक विद्युतधाराओं की अधिकता होती है।

इस सिद्धान्त को हम पक्षाघात रोग के द्वारा भी समझ सकते हैं। इस रोग में व्यक्ति के शरीर का एक हिस्सा जड़ हो जाता है जबकि दूसरा हिस्सा पूर्ववत् क्रियाशील बना रहता है। अतः मानव शरीर एक होने के बावजूद भी उसके दो हिस्सों में दो अलग-अलग प्रकार की विद्युतधारायें बहती रहती हैं।

जब हम माता-पिता तथा गुरूजनों को प्रणाम करते हैं तो स्वाभाविक रूप से हमारे दायें-बायें अंग उनके दायें-बायें अंगों से विपरीत होते हैं। जब हम अपनी ऋषिपरम्परा के अनुसार अपने हाथों से चौकड़ी (X) का चिन्ह बनाते हुए अपने दायें हाथ से उनका दायाँ चरण तथा बायें हाथ से बायाँ चरण छूते हैं तो हमारे तथा उनके शरीर की धनात्मक एवं ऋणात्मक विद्युतधाराएँ आपस में मिल जाती हैं जिसे वैज्ञानिक लोग औरा (Aura) बोलते हैं।

इसके बाद जब वे आदरणीय प्रणाम करने वाले के सिर, कंधों अथवा पीठ पर अपना हाथ रखते हैं तो इस स्थिति में दोनों शरीरों में बहने वाली विद्युत का एक आवर्त (वलय) बन जाता है। आज कल विशिष्ट प्रकार के कैमरा निकले हैं जो उस तेजोवलय का चित्र भी खींचते हैं।
स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ
यहाँ पर यह बताना भी आवश्यक होगा कि ये विद्युतधाराएँ मात्र शरीर में ही नहीं बहती हैं अपितु इनकी सूक्ष्म तरंगे शरीर के रोमकूपों तथा नुकीले मार्गों से बाहर भी निकलती हैं। इन्हीं तरंगों को हमारे ऋषियों ने 'तेजोवलय' का नाम दिया है।

शरीर द्वारा होने वाली चेष्टाओं का मूल केन्द्र मस्तिष्क है। किसी भी कार्य द्वारा निर्णय करने के पश्चात उसकी आज्ञानुसार शरीर के सभी अंग अपना-अपना कार्य करते हैं। मस्तिष्क के विचारों के पूरे शरीर तक पहुँचाने में इस विद्युतशक्ति का बड़ा योगदान होता है। नारी अपने मस्तक पर भ्रूमध्य में तिलक करे। कन्याओं के लिए भी तिलक आत्मबलवर्धक है।

मनोविज्ञान के अनुसार जब कोई व्यक्ति क्रोध अथवा किसी बुरे विचार से उद्विग्न होता है तो उसके शरीर से निकलने वाले विद्युत कणों के सम्पर्क में आने वाला दूसरा व्यक्ति भी उद्विग्न सा हो जाता है। वह उसके नजदीक नहीं रहना चाहता या अपनी सामान्य मनःस्थिति से विचलित हो जाता है।

कहने का तात्पर्य है कि हमारे मस्तिष्क के विचार विद्युतशक्ति के द्वारा शरीर में फैलते हैं तथा यही विद्युतशक्ति जब तेजोवलय के रूप में शरीर से बाहर निकलती है तो उसमें उन विचारों का समावेश भी होता है इसीलिए उसके तेजोवलय के सम्पर्क में आनेवाले व्यक्ति को भी उसके विचार प्रभावित कर देते हैं।
स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ
जब हम अपने आदरणीय जनों के चरण स्पर्श करते हैं तो हमारे मस्तिष्क में प्रसन्नता के साथ-साथ उनके प्रति आदर, सम्मान एवं कृतज्ञता के विचार उत्पन्न होते हैं। जब दोनों की विद्युतधाराएँ आपस में मिलती हैं तो दोनों में भावनाओं का आदान प्रदान होता है। इस प्रकार आदरणीयजनों की ऊँची भावनायें जब विद्युत तरंगों के माध्यम से हमारे मस्तिष्क तक पहुँचती है तो वह अपनी ग्रहणशील प्रकृति के अनुसार उन्हें संस्कारों के रूप में संचित कर लेता है। ये संस्कार ही मनुष्य को उत्थान अथवा पतन की ओर ले जाते हैं।

इस सिद्धान्त का एक व्यावहारिक उदाहरण है कि जब एक व्यक्ति परदेश से आकर अपने मित्रों से मिलता है तो वह प्रसन्न होकर हँसी-मजाक करता है। परन्तु जैसे ही वह अपने माता पिता एवं गुरूजनों को प्रणाम करता है उसके विचार स्वाभाविक ही गम्भीर हो जाते हैं। उसके मस्तिष्क में उन्नत होने के कुछ विचार उत्पन्न होते हैं।

जैसे जले हुए दीपक के संपर्क में आने पर दूसरा दीपक भी उसके प्रकाश आदि समस्त गुणों को ग्रहण कर लेता है परन्तु इससे उस जले हुए दीपक को कुछ हानि नहीं होती, इसी प्रकार गुरूजनों के दैवी गुण प्रणाम-पद्धति के अनुसार प्रणामकर्ता में आ जाते हैं परन्तु प्रणम्य गुरूजनों की शक्ति में इससे कोई कमी नहीं होती।
स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ
साधारण सी दिखने वाली हमारी अभिवादन-पद्धति में हमारे ऋषियों ने कितनी महान उन्नति संजोयी है परन्तु उन्हीं ऋषियों की हम सन्तानें पश्चिमवासियों का अंधानुकरण करके 'हाय-हेलो' कहकर अपने आदरणीयजनों की जीवनशैली एवं महान पूर्वजों का अपमान करते हैं।

जिससे हमारा जीवन ऊर्ध्वगामी एवं महान बने ऐसी सनातन अभिवादन पद्धति को छोड़कर 'गुड-मार्निंग' अथवा 'हाय-हेलो' कहना कौवे की काँव-काँव तथा तोते की टें-टें से किसी भी प्रकार भी बड़ा नहीं है। आप अपने धर्म के अनुसार कुछ भी और शब्द बोल सकते है जैसे राम राम बोलिए राधे राधे बोलिए जय जिनेन्द्र बोलिए शत श्री आकाल बोलिए जै हिन्द - वंदेमातरम बोलिए

सोचिए जरा !! भारतीय संस्कृति बचाइए !!

muslim 5 time namaaj

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल
आता है ........की ये जिहाद आखिर
बला क्या है मुस्लिम सारे के सारे 5
वक़्त की नमाज़ की जगह जिहाद के पीछे
क्यों दौड़ते है ।
थोडा बहुत इधर उधर से खोजबीन
पुछताछ की तो पता चला की ये
तो बड़ा भयंकर कार्य है आईये आपके
साथ भी शेयर करता हु ।
मुहम्मद पूरी दुनिया पर
कब्जा करना चाहता था इसलिए वह
चाहता था कि मुसलमानों का हरेक
बच्चा हिंसक, क्रूर, और निर्दय बन
जाए. ताकि वह बड़ा होकर जिहादी बने
तो, उसे निर्दोष लोगों की ह्त्या करने में
किसी तरह का संकोच नही हो.
इसके लिए मुहम्मद ने एक चाल चली,
उसने हत्या का एक पाठ्यक्रम
ही बना दिया. सबसे पाहिले छोटे छोटे
प्राणियों को शैतान की रचना बता कर
उनकी ह्त्या को जायज बना दिया. फिर
कुरबानी के बहाने पशुओं
की ह्त्या को धार्मिक कार्य बता दिया.
और आखिर में गैर मुस्लिमों को काफ़िर
बता कर उनकी ह्त्या को जायज
बता दिया और साथ ही इन अनपढ़
जाहिलो को लालच दे
दिया की जो इस्लाम न माने वो काफिर ,
और कुरआन काफिरों को क़त्ल करने
की इजाजत देता है, यानि जितने भी हिंदू
है जो इस्लाम नहीं मानते वो काफ़िर है ,
यदि उनको मार दिया जाए तो जन्नत
नसीब होगी जहाँ ७२ कुँवारी हूरे
उनका इन्तजार कर रही होंगी.
अब ये बेचारे मारकाट कर रहे है जन्नत में
जाकर 72 कुवारी हूरों का मज़ा लेने के
लिए । मरने के बाद जन्नत में खूबसूरत
जवान हूरें
मिलेंगी ,जो कभी बूढ़ी नहीं होंगी .उनकी
उम्र हमेशा १४-१५ साल
की रहेगी.जन्नत वाले किसी भी हूर से
शारीरिक सम्बन्ध बना सकेंगे. जन्नत में
हूरों के अलावा सुन्दर लडके
भी होंगे ,जिन्हें गिलमा कहा गया है .
और तो और ये भी कहा गया है
की जन्नत में जाने वाले जिहाद की काम
शक्ति अल्लाह 100
गुना बढा देगा ( जैसे अल्लाह ना हुआ
वियाग्रा का मैन्युफैक्चर हो गया )
दूसरी बात समाजह नहीं आती की ये
अल्लाह ने ऐसी कोनसी फेक्टरी खोल
राखी है जिनमे से इतनी सारी हुरे रोज़
निकलती है खैर अपने
को क्या करना समझ कर अपनी बात
आगे बढ़ाते है
इस्लाम में पवित्र योद्धाओ (आतंकियो)
को यौन-सुखों और भोगविलास के
असामान्य विशेषाधिकार दिए गए हैं।
यदि वे लड़ाई के मैदान में जीवित रह
जाते हैं तो उनके लिए गैर-
मुसलमानों की स्त्रियाँ रखैलों के रूप में
सुनिश्चित हो जाती हैं। लेकिन यदि वे
युद्ध के मैदान में मारे जाते हैं तो वे
हूरियों से भरे 'जन्नत' के अत्यन्त
विलासिता पूर्ण वातावरण में निश्चित रूप
से प्रवेश के अधिकारी हो जाते हैं।
अल्लाह को खुश करने के लिये कई जगह
मुर्तिपूजको तथा गैर-मुसलमानों की संहार
योजना में भाग लेने के बदले में यौन-
सुखों के
प्रलोभनों का वायदा किया जाता है जैसे
कि
यदि वह (आतंक फैलाने वाला ) युद्ध
भूमि की कठिन
परिस्थितियों मारा गया तो उसे 'जन्नत'
में उसकी प्रतीक्षा कर रहीं अनेक
हूरों के साथ असीमित भोगविलासों एवं
यौन-सुखों का आनंद मिलेगा, और
यदि वह जीवित बचा रहा तो उसको 'गैर-
ईमान वालों' के लूट के माल, जिसमें
कि उनकी स्त्रियाँ भी शामिल होंगी, में
हिस्सा मिलेगा।
इन आतंकियो को कितनी अच्छी तरह से
हूरो का लालच दे कर
बरगलाया जा रहा है हदीस
तिरमिज़ी खंड-2 पृ.(35-40) में दिए
गए हूरों के सौंदर्य के वर्णन इस प्रकार
है
हूर एक अत्यधिक सुंदर
युवा स्त्री होती है जिसका शरीर
पारदर्शी होता है। उसकी हड्डियों में
बहने वाला द्रव्य इसी प्रकार दिखाई
देता है जैसे रूबी और मोतियों के अंदर
की रेखाएँ दिखती हैं। वह एक
पारदर्शी सफेद गिलास में लाल शराब
की भाँति दिखाई देता है।
उसका रंग सफेद है, और साधारण
स्त्रियों की तरह शारीरिक कमियों जैसे
मासिक धर्म, रजोनिवृत्ति, मल व
मूत्रा विसर्जन, गर्भधारण
इत्यादि संबंधित विकारों से मुक्त
होती है।
प्रत्येक हूर किशोर वय
की कन्या होती है। उसके उरोज उन्नत,
गोल और बडे होते हैं जो झुके हुए नहीं हैं।
हूरें भव्य परिसरों वाले महलों में रहतीं हैं।
हूर यदि 'जन्नत' में अपने आवास से
पृथ्वी की ओर देखे तो सारा मार्ग
सुगंधित और प्रकाशित हो जाता है।
हूर का मुख दर्पण से भी अधिाक
चमकदार होता है, तथा उसके गाल में
कोई भी अपना प्रतिबिंब देख सकता है।
उसकी हड्डियों का द्रव्य ऑंखों से
दिखाई देता है।
प्रत्येक व्यक्ति जो 'जन्नत' में जाता है,
उसको 72 हूरें दी जाएँगी। जब वह
'जन्नत' में प्रवेश करता है, मरते समय
उसकी उम्र कुछ भी हो, वहाँ तीस वर्ष
का युवक हो जाएगा और उसकी आयु
आगे नहीं बढ़ेगी।
अब भई अब जब हूर इतनी खूब
होगीं तो कोई क्यो न अल्लाह के लिये
मरने को तैयार होगा, इन
आतंकियो का यही मकसद होता है
कि घरती पर उनके विलास के लिये
अल्लाह
द्वारा दिया गया मसौदा तो तैयार ही है
और जन्नत में भी हूरे उनका इन्जार कर
रही है। सोने पर सुहागा
हदीस तिरमिज़ी खंड-2 (पृ.138)
करती है कि ''जन्नत में एक पुरुष को एक
सौ पुरुषों के बराबर
कामशक्ति दी जाएगी'' :) जैसे जन्नत में
थोक के भाव
वियाग्रा की फैक्ट्री लगी है। क्या इसके
बाद भी यौन-सुखों के लिए आकर्षित
करने वाले प्रलोभनों और
प्रमाणों को देने की आवश्यकता रह
जाती है जो कि इस्लाम अपने
जिहादी योद्धाओ को प्रेरित करने के
लिए प्रस्तुत करता है ?
भाइयो आप खुद ही तय करो की अब ये
जिहाद धर्म युद्ध है या काम(सेक्स)
युद्ध
बाकी बाते अगली बार
जय श्री राम