Thursday, 26 September 2013

matra bhumi bharat

तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
जलवायु अन्न सुमधुर, फल फूल दायिनी माँ! धन धान्य सम्पदा सुख, गौरव प्रदायिनी माँ!!
शत-शत नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!

अति शुभ्र ज्योत्स्ना से, पुलकित सुयामिनी है। द्रुमदल लतादि कुसुमित, शोभा सुहावनी है।।
यह छवि स्वमन धरें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

कसकर कमर खड़े हैं, हम कोटि सुत तिहारे। क्या है मजाल कोई, दुश्मन तुझे निहारे।।
अरि-दल दमन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

तू ही हमारी विद्या, तू ही परम धरम है। तू ही हमारा मन है, तू ही वचन करम है।।
तेरा भजन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

तेरा मुकुट हिमालय, उर-माल यमुना-गंगा। तेरे चरण पखारे, उच्छल जलधि तरंगा।।
अर्पित सु-मन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

बैठा रखी है हमने, तेरी सु-मूर्ति मन में। फैला के हम रहेंगे, तेरा सु-यश भुवन में।।
गुंजित गगन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

पूजा या पन्थ कुछ हो, मानव हर-एक नर है। हैं भारतीय हम सब, भारत हमारा घर है।।
ऐसा मनन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

vande matram

तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत! हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!
जलवायु अन्न सुमधुर, फल फूल दायिनी माँ! धन धान्य सम्पदा सुख, गौरव प्रदायिनी माँ!!
शत-शत नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!

अति शुभ्र ज्योत्स्ना से, पुलकित सुयामिनी है। द्रुमदल लतादि कुसुमित, शोभा सुहावनी है।।
यह छवि स्वमन धरें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

कसकर कमर खड़े हैं, हम कोटि सुत तिहारे। क्या है मजाल कोई, दुश्मन तुझे निहारे।।
अरि-दल दमन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

तू ही हमारी विद्या, तू ही परम धरम है। तू ही हमारा मन है, तू ही वचन करम है।।
तेरा भजन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

तेरा मुकुट हिमालय, उर-माल यमुना-गंगा। तेरे चरण पखारे, उच्छल जलधि तरंगा।।
अर्पित सु-मन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

बैठा रखी है हमने, तेरी सु-मूर्ति मन में। फैला के हम रहेंगे, तेरा सु-यश भुवन में।।
गुंजित गगन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

पूजा या पन्थ कुछ हो, मानव हर-एक नर है। हैं भारतीय हम सब, भारत हमारा घर है।।
ऐसा मनन करें हम, हे मातृभूमि भारत! तुझको नमन करें हम, हे मातृभूमि भारत!!
हे मातृभूमि भारत! हे पितृभूमि भारत!!

political dovelopment

28. देश को विकास की राजनीति की जरूरत ।


वीडीयो पार्ट -1 ... http://www.youtube.com/watch?v=MaeJnR9zKug


वीडीयो पार्ट -2 ... http://www.youtube.com/watch?v=kgIum0EK_ik

hello hii

हाय-हेलो' से बड़ों का अपमान न करें......

आप अपने धर्म के अनुसार कुछ भी और शब्द बोल सकते है जैसे राम राम बोलिए राधे राधे बोलिए जय जिनेन्द्र बोलिए शत श्री आकाल बोलिए जै हिन्द - वंदेमातरम, जै भारत बोलिए

हमारी सनातन संस्कृति में माता-पिता तथा गुरूजनों को नित्य चरणस्पर्श करके प्रणाम करने का विधान है। चरणस्पर्श करके प्रणाम न कर सकें तो दोनों हाथ जोड़कर ही नमस्कार करें। कन्याओं को तो किसी भी पुरूष के पैर छूकर प्रणाम करना ही नहीं चाहिए। शास्त्रों में आता हैः

अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः। चत्वारि तस्य वर्द्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्।।

'जो नम्रताशील हैं तथा नित्य बड़ों की सेवा करता है उसके आयु, विद्या, यश एवं बल ये चारों बढ़ते हैं।'

हमारी संस्कृति में अभिवादन करना 'गुड मार्निंग', 'गुड इवनिंग' अथवा 'हेलो-हाय' की भाँति एक निरर्थक व्यापार नहीं है जिसमें लाभ तो कुछ होता नहीं अपितु व्यर्थ की वाणी नष्ट होती है और चंचलता आती है। मनु आदि महर्षियों ने हमारी संस्कृति की अभिवादन पद्धति के चार लाभ बताये हैं – आयुवृद्धि, विद्यावृद्धि, यशवृद्धि एवं बलवृद्धि। यही चार वस्तुएँ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के लिए आवश्यक हैं। अर्थात् बड़ों के चरणस्पर्श करने से पुरूषार्थ चातुष्टय साधने में सहायता मिलती है।

यह मात्र कल्पना नहीं अपितु एक ऐसा कठोर सत्य है जिसे स्वीकार करने के लिए आज का विज्ञान भी मजबूर हो गया है।

प्रत्येक मनुष्य के शरीर में धनात्मक एवं ऋणात्मक विद्युतधारायें सतत प्रवाहित होती रहती हैं। शरीर के दायें भाग में धनात्मक एवं बायें हिस्से में ऋणात्मक विद्युतधाराओं की अधिकता होती है।

इस सिद्धान्त को हम पक्षाघात रोग के द्वारा भी समझ सकते हैं। इस रोग में व्यक्ति के शरीर का एक हिस्सा जड़ हो जाता है जबकि दूसरा हिस्सा पूर्ववत् क्रियाशील बना रहता है। अतः मानव शरीर एक होने के बावजूद भी उसके दो हिस्सों में दो अलग-अलग प्रकार की विद्युतधारायें बहती रहती हैं।

जब हम माता-पिता तथा गुरूजनों को प्रणाम करते हैं तो स्वाभाविक रूप से हमारे दायें-बायें अंग उनके दायें-बायें अंगों से विपरीत होते हैं। जब हम अपनी ऋषिपरम्परा के अनुसार अपने हाथों से चौकड़ी (X) का चिन्ह बनाते हुए अपने दायें हाथ से उनका दायाँ चरण तथा बायें हाथ से बायाँ चरण छूते हैं तो हमारे तथा उनके शरीर की धनात्मक एवं ऋणात्मक विद्युतधाराएँ आपस में मिल जाती हैं जिसे वैज्ञानिक लोग औरा (Aura) बोलते हैं।

इसके बाद जब वे आदरणीय प्रणाम करने वाले के सिर, कंधों अथवा पीठ पर अपना हाथ रखते हैं तो इस स्थिति में दोनों शरीरों में बहने वाली विद्युत का एक आवर्त (वलय) बन जाता है। आज कल विशिष्ट प्रकार के कैमरा निकले हैं जो उस तेजोवलय का चित्र भी खींचते हैं।
स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ
यहाँ पर यह बताना भी आवश्यक होगा कि ये विद्युतधाराएँ मात्र शरीर में ही नहीं बहती हैं अपितु इनकी सूक्ष्म तरंगे शरीर के रोमकूपों तथा नुकीले मार्गों से बाहर भी निकलती हैं। इन्हीं तरंगों को हमारे ऋषियों ने 'तेजोवलय' का नाम दिया है।

शरीर द्वारा होने वाली चेष्टाओं का मूल केन्द्र मस्तिष्क है। किसी भी कार्य द्वारा निर्णय करने के पश्चात उसकी आज्ञानुसार शरीर के सभी अंग अपना-अपना कार्य करते हैं। मस्तिष्क के विचारों के पूरे शरीर तक पहुँचाने में इस विद्युतशक्ति का बड़ा योगदान होता है। नारी अपने मस्तक पर भ्रूमध्य में तिलक करे। कन्याओं के लिए भी तिलक आत्मबलवर्धक है।

मनोविज्ञान के अनुसार जब कोई व्यक्ति क्रोध अथवा किसी बुरे विचार से उद्विग्न होता है तो उसके शरीर से निकलने वाले विद्युत कणों के सम्पर्क में आने वाला दूसरा व्यक्ति भी उद्विग्न सा हो जाता है। वह उसके नजदीक नहीं रहना चाहता या अपनी सामान्य मनःस्थिति से विचलित हो जाता है।

कहने का तात्पर्य है कि हमारे मस्तिष्क के विचार विद्युतशक्ति के द्वारा शरीर में फैलते हैं तथा यही विद्युतशक्ति जब तेजोवलय के रूप में शरीर से बाहर निकलती है तो उसमें उन विचारों का समावेश भी होता है इसीलिए उसके तेजोवलय के सम्पर्क में आनेवाले व्यक्ति को भी उसके विचार प्रभावित कर देते हैं।
स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ
जब हम अपने आदरणीय जनों के चरण स्पर्श करते हैं तो हमारे मस्तिष्क में प्रसन्नता के साथ-साथ उनके प्रति आदर, सम्मान एवं कृतज्ञता के विचार उत्पन्न होते हैं। जब दोनों की विद्युतधाराएँ आपस में मिलती हैं तो दोनों में भावनाओं का आदान प्रदान होता है। इस प्रकार आदरणीयजनों की ऊँची भावनायें जब विद्युत तरंगों के माध्यम से हमारे मस्तिष्क तक पहुँचती है तो वह अपनी ग्रहणशील प्रकृति के अनुसार उन्हें संस्कारों के रूप में संचित कर लेता है। ये संस्कार ही मनुष्य को उत्थान अथवा पतन की ओर ले जाते हैं।

इस सिद्धान्त का एक व्यावहारिक उदाहरण है कि जब एक व्यक्ति परदेश से आकर अपने मित्रों से मिलता है तो वह प्रसन्न होकर हँसी-मजाक करता है। परन्तु जैसे ही वह अपने माता पिता एवं गुरूजनों को प्रणाम करता है उसके विचार स्वाभाविक ही गम्भीर हो जाते हैं। उसके मस्तिष्क में उन्नत होने के कुछ विचार उत्पन्न होते हैं।

जैसे जले हुए दीपक के संपर्क में आने पर दूसरा दीपक भी उसके प्रकाश आदि समस्त गुणों को ग्रहण कर लेता है परन्तु इससे उस जले हुए दीपक को कुछ हानि नहीं होती, इसी प्रकार गुरूजनों के दैवी गुण प्रणाम-पद्धति के अनुसार प्रणामकर्ता में आ जाते हैं परन्तु प्रणम्य गुरूजनों की शक्ति में इससे कोई कमी नहीं होती।
स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ
साधारण सी दिखने वाली हमारी अभिवादन-पद्धति में हमारे ऋषियों ने कितनी महान उन्नति संजोयी है परन्तु उन्हीं ऋषियों की हम सन्तानें पश्चिमवासियों का अंधानुकरण करके 'हाय-हेलो' कहकर अपने आदरणीयजनों की जीवनशैली एवं महान पूर्वजों का अपमान करते हैं।

जिससे हमारा जीवन ऊर्ध्वगामी एवं महान बने ऐसी सनातन अभिवादन पद्धति को छोड़कर 'गुड-मार्निंग' अथवा 'हाय-हेलो' कहना कौवे की काँव-काँव तथा तोते की टें-टें से किसी भी प्रकार भी बड़ा नहीं है। आप अपने धर्म के अनुसार कुछ भी और शब्द बोल सकते है जैसे राम राम बोलिए राधे राधे बोलिए जय जिनेन्द्र बोलिए शत श्री आकाल बोलिए जै हिन्द - वंदेमातरम बोलिए

सोचिए जरा !! भारतीय संस्कृति बचाइए !!

muslim 5 time namaaj

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल
आता है ........की ये जिहाद आखिर
बला क्या है मुस्लिम सारे के सारे 5
वक़्त की नमाज़ की जगह जिहाद के पीछे
क्यों दौड़ते है ।
थोडा बहुत इधर उधर से खोजबीन
पुछताछ की तो पता चला की ये
तो बड़ा भयंकर कार्य है आईये आपके
साथ भी शेयर करता हु ।
मुहम्मद पूरी दुनिया पर
कब्जा करना चाहता था इसलिए वह
चाहता था कि मुसलमानों का हरेक
बच्चा हिंसक, क्रूर, और निर्दय बन
जाए. ताकि वह बड़ा होकर जिहादी बने
तो, उसे निर्दोष लोगों की ह्त्या करने में
किसी तरह का संकोच नही हो.
इसके लिए मुहम्मद ने एक चाल चली,
उसने हत्या का एक पाठ्यक्रम
ही बना दिया. सबसे पाहिले छोटे छोटे
प्राणियों को शैतान की रचना बता कर
उनकी ह्त्या को जायज बना दिया. फिर
कुरबानी के बहाने पशुओं
की ह्त्या को धार्मिक कार्य बता दिया.
और आखिर में गैर मुस्लिमों को काफ़िर
बता कर उनकी ह्त्या को जायज
बता दिया और साथ ही इन अनपढ़
जाहिलो को लालच दे
दिया की जो इस्लाम न माने वो काफिर ,
और कुरआन काफिरों को क़त्ल करने
की इजाजत देता है, यानि जितने भी हिंदू
है जो इस्लाम नहीं मानते वो काफ़िर है ,
यदि उनको मार दिया जाए तो जन्नत
नसीब होगी जहाँ ७२ कुँवारी हूरे
उनका इन्तजार कर रही होंगी.
अब ये बेचारे मारकाट कर रहे है जन्नत में
जाकर 72 कुवारी हूरों का मज़ा लेने के
लिए । मरने के बाद जन्नत में खूबसूरत
जवान हूरें
मिलेंगी ,जो कभी बूढ़ी नहीं होंगी .उनकी
उम्र हमेशा १४-१५ साल
की रहेगी.जन्नत वाले किसी भी हूर से
शारीरिक सम्बन्ध बना सकेंगे. जन्नत में
हूरों के अलावा सुन्दर लडके
भी होंगे ,जिन्हें गिलमा कहा गया है .
और तो और ये भी कहा गया है
की जन्नत में जाने वाले जिहाद की काम
शक्ति अल्लाह 100
गुना बढा देगा ( जैसे अल्लाह ना हुआ
वियाग्रा का मैन्युफैक्चर हो गया )
दूसरी बात समाजह नहीं आती की ये
अल्लाह ने ऐसी कोनसी फेक्टरी खोल
राखी है जिनमे से इतनी सारी हुरे रोज़
निकलती है खैर अपने
को क्या करना समझ कर अपनी बात
आगे बढ़ाते है
इस्लाम में पवित्र योद्धाओ (आतंकियो)
को यौन-सुखों और भोगविलास के
असामान्य विशेषाधिकार दिए गए हैं।
यदि वे लड़ाई के मैदान में जीवित रह
जाते हैं तो उनके लिए गैर-
मुसलमानों की स्त्रियाँ रखैलों के रूप में
सुनिश्चित हो जाती हैं। लेकिन यदि वे
युद्ध के मैदान में मारे जाते हैं तो वे
हूरियों से भरे 'जन्नत' के अत्यन्त
विलासिता पूर्ण वातावरण में निश्चित रूप
से प्रवेश के अधिकारी हो जाते हैं।
अल्लाह को खुश करने के लिये कई जगह
मुर्तिपूजको तथा गैर-मुसलमानों की संहार
योजना में भाग लेने के बदले में यौन-
सुखों के
प्रलोभनों का वायदा किया जाता है जैसे
कि
यदि वह (आतंक फैलाने वाला ) युद्ध
भूमि की कठिन
परिस्थितियों मारा गया तो उसे 'जन्नत'
में उसकी प्रतीक्षा कर रहीं अनेक
हूरों के साथ असीमित भोगविलासों एवं
यौन-सुखों का आनंद मिलेगा, और
यदि वह जीवित बचा रहा तो उसको 'गैर-
ईमान वालों' के लूट के माल, जिसमें
कि उनकी स्त्रियाँ भी शामिल होंगी, में
हिस्सा मिलेगा।
इन आतंकियो को कितनी अच्छी तरह से
हूरो का लालच दे कर
बरगलाया जा रहा है हदीस
तिरमिज़ी खंड-2 पृ.(35-40) में दिए
गए हूरों के सौंदर्य के वर्णन इस प्रकार
है
हूर एक अत्यधिक सुंदर
युवा स्त्री होती है जिसका शरीर
पारदर्शी होता है। उसकी हड्डियों में
बहने वाला द्रव्य इसी प्रकार दिखाई
देता है जैसे रूबी और मोतियों के अंदर
की रेखाएँ दिखती हैं। वह एक
पारदर्शी सफेद गिलास में लाल शराब
की भाँति दिखाई देता है।
उसका रंग सफेद है, और साधारण
स्त्रियों की तरह शारीरिक कमियों जैसे
मासिक धर्म, रजोनिवृत्ति, मल व
मूत्रा विसर्जन, गर्भधारण
इत्यादि संबंधित विकारों से मुक्त
होती है।
प्रत्येक हूर किशोर वय
की कन्या होती है। उसके उरोज उन्नत,
गोल और बडे होते हैं जो झुके हुए नहीं हैं।
हूरें भव्य परिसरों वाले महलों में रहतीं हैं।
हूर यदि 'जन्नत' में अपने आवास से
पृथ्वी की ओर देखे तो सारा मार्ग
सुगंधित और प्रकाशित हो जाता है।
हूर का मुख दर्पण से भी अधिाक
चमकदार होता है, तथा उसके गाल में
कोई भी अपना प्रतिबिंब देख सकता है।
उसकी हड्डियों का द्रव्य ऑंखों से
दिखाई देता है।
प्रत्येक व्यक्ति जो 'जन्नत' में जाता है,
उसको 72 हूरें दी जाएँगी। जब वह
'जन्नत' में प्रवेश करता है, मरते समय
उसकी उम्र कुछ भी हो, वहाँ तीस वर्ष
का युवक हो जाएगा और उसकी आयु
आगे नहीं बढ़ेगी।
अब भई अब जब हूर इतनी खूब
होगीं तो कोई क्यो न अल्लाह के लिये
मरने को तैयार होगा, इन
आतंकियो का यही मकसद होता है
कि घरती पर उनके विलास के लिये
अल्लाह
द्वारा दिया गया मसौदा तो तैयार ही है
और जन्नत में भी हूरे उनका इन्जार कर
रही है। सोने पर सुहागा
हदीस तिरमिज़ी खंड-2 (पृ.138)
करती है कि ''जन्नत में एक पुरुष को एक
सौ पुरुषों के बराबर
कामशक्ति दी जाएगी'' :) जैसे जन्नत में
थोक के भाव
वियाग्रा की फैक्ट्री लगी है। क्या इसके
बाद भी यौन-सुखों के लिए आकर्षित
करने वाले प्रलोभनों और
प्रमाणों को देने की आवश्यकता रह
जाती है जो कि इस्लाम अपने
जिहादी योद्धाओ को प्रेरित करने के
लिए प्रस्तुत करता है ?
भाइयो आप खुद ही तय करो की अब ये
जिहाद धर्म युद्ध है या काम(सेक्स)
युद्ध
बाकी बाते अगली बार
जय श्री राम

kaliyug


शास्त्रों के अनुसार कलियुग में हनुमानजी सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता बताए गए हैं !! जिन लोगों पर बजरंग बली कृपा करते हैं उनकी किस्मत रातोंरात बदल जाती हैं !! यदि आप भी हनुमानजी की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो यहां बताई जा रही कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखें-

१. बजरंग बली को लाल या पीले रंग के फूल विशेष रूप से अर्पित किए जाने चाहिए !! इन फूलों में कमल, गेंदा, गुलाब आदि विशेष महत्व रखते हैं !! हनुमानजी की पूजा या मंदिर में शुद्धता एवं पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए !! ध्यान रखें हनुमानजी को केसर के साथ घिसा लाल चंदन का तिलक लगाना चाहिए !!

२. हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ या सुंदरकांड का पाठ करना श्रेष्ठ उपाय है !!

३. सुबह के समय हनुमानजी प्रसाद के रूप में गुड़, नारियल, लड्डू चढ़ाया जाना चाहिए!!

४. दोपहर के समय बजरंग बली को गुड़, घी, गेहूं के आटे से बनी रोटी का चूरमा अर्पित किया जा सकता है !!

५. शाम के समय हनुमानजी को फल जैसे आम, केले, अमरूद, सेवफल आदि का भोग लगाना चाहिए !!

६. बजरंग बली के श्रृंगार में या चोला चढ़ाते समय तिल के तेल या चमेली के तेल में मिला हुआ सिंदूर लगाना चाहिए !!

७. भगवान को भोग लगाने के बाद भक्त को प्रसाद अन्य भक्तों में वितरित करके स्वयं भी ग्रहण करना चाहिए !!

८. सप्ताह में दो दिन मंगलवार और शनिवार को हनुमानजी के निमित्त विशेष पूजन-अर्चन करना चाहिए !! इन दिनों में बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त होती है !!
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Named scandals in India
ScandalYear reportedScopeLocationKey playersSummary
2012 Indian coal mining controversy2012INR1,855,913.4 million (US$34 billion)nationComptroller and Auditor General of India, the coal ministry, many electricity boards and private companiescoal blocks allotted, not auctioned, leading to estimated losses as per the Comptroller and Auditor General of India[1][2][3]
Karnataka Wakf Board Land Scam2012INR2,000 billion (US$37 billion)Karnataka[4][5]
Uttar Pradesh NRHM scam2012INR100 billion (US$1.8 billion)Uttar PradeshMayawati[6][7][8][9][10]
2G spectrum scam2010INR1,760 billion (US$32 billion)nationalNira Radia, A. Raja, M. K. Kanimozhi, many telecommunications companiescommunication bandwidth auctioned for lower than market value[11][12]
Uttar Pradesh food grain scam2003INR350 billion (US$6.4 billion)Uttar PradeshKapil Sibal, Mulayam Singh Yadav, MayawatiFood which the government purchased to give to the poor was instead sold on the open market[13][14][15][16]

[edit]2012

[edit]2011

[edit]2010

[edit]2000s

[edit]2009

[edit]2008

[edit]2006

[edit]2005

  • Taj Co-operative Group Housing Scheme scam – INR40 billion (US$730 million)[221][222]
  • IPO scam[223][224]
  • Bihar flood relief scam – INR170 million (US$3.1 million)[225]

[edit]2004

[edit]2003

[edit]2002

[edit]2001

[edit]2000

[edit]1990s

[edit]1997

[edit]1996

[edit]1995

  • Meghalya forest scam – INR3 billion (US$55 million)[211]
  • Preferential allotment scam – INR50 billion (US$920 million)[36]
  • Yugoslav Dinar Scam – INR4 billion (US$73 million)[36]

[edit]1994

[edit]1992

[edit]1990

[edit]1980s

[edit]1989

[edit]1981

[edit]1970s

[edit]1976

  • Kuo oil scandal – INR22 million (US$400,000)[40]

[edit]1974

[edit]1960s

[edit]1965

  • Kaling tubes scandal[40]

[edit]1964

[edit]1960

  • Teja loan scandal – INR220 million (US$4.0 million)[233]

[edit]1950s

[edit]1956

  • BHU funds misappropriation – INR5 million (US$92,000)[233]

[edit]1951

[edit]1948s

Jeep Purchase (1948)[244]

[edit]