Thursday, 7 February 2013

‘चौदहवीं का चाँद’ वह ऐतिहासिक ग्रन्थ है जिसने भारत की तकदीर बदल कर रख दी|

‘चौदहवीं का चाँद’ वह ऐतिहासिक ग्रन्थ है
जिसने भारत की तकदीर बदल कर रख दी|
इस्लाम के दर्शन (फलसफा) का विश्लेषण करने
वाली इस से बेहतरीन पुस्तक आज तक
नहीं लिखी गयी|
१८८३ में स्वामी दयानंद ने सत्यार्थ प्रकाश
लिखा था जिसने शुद्धि का एक आन्दोलन
खड़ा कर दिया| लाखों मुस्लमान भाई और बहनें
फिर से अपने घर – वैदिक धर्म – की और
लौटने लगे| कठमुल्लाओं को इससे बड़ी तकलीफ
हुई और इसे के जवाब में मौलाना सनाउल्लाह ने
एक पुस्तक लिखी “हक प्रकाश” जो सत्यार्थ
प्रकाश के १४ वे समुल्लास (जो इस्लाम
का विश्लेषण करता है) का जवाब था|
मतान्ध मुल्ले जश्न मन ही रहे थे की पंडित
चमूपति ने उर्दू में यह ग्रन्थ लिख डाला| इसने
शुद्धि आन्दोलन को वो गति दी कि हिंदुस्तान
टूटने से बच गया| आज तक कोई इस्लामिक
विद्वान् इस पुस्तक का जवाब नहीं दे पाया|
अग्निवीर के लेख भी इस पुस्तक से प्रबल रूप
से प्रेरित हैं|
इसे सरसरी रूप से भी पढने
वाला बड़ी सरलता से जाकिर नाइक जैसे
धूर्तों कि पोल-खोल कर सकता है| इस पुस्तक
को ध्यान से पढ़ें और अधिक से अधिक प्रचार
करें| मुसलमान भाइयों को इन बर्बर मतान्ध
धोखेबाज़ मुल्लों से बचने का इस से बढ़कर कोई
उपाय नहीं है|

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