कभी कभी मेरे दिल में ख्याल
आता है ........की ये जिहाद आखिर
बला क्या है मुस्लिम सारे के सारे 5
वक़्त की नमाज़ की जगह जिहाद के पीछे
क्यों दौड़ते है ।
थोडा बहुत इधर उधर से खोजबीन
पुछताछ की तो पता चला की ये
तो बड़ा भयंकर कार्य है आईये आपके
साथ भी शेयर करता हु ।
मुहम्मद पूरी दुनिया पर
कब्जा करना चाहता था इसलिए वह
चाहता था कि मुसलमानों का हरेक
बच्चा हिंसक, क्रूर, और निर्दय बन
जाए. ताकि वह बड़ा होकर जिहादी बने
तो, उसे निर्दोष लोगों की ह्त्या करने में
किसी तरह का संकोच नही हो.
इसके लिए मुहम्मद ने एक चाल चली,
उसने हत्या का एक पाठ्यक्रम
ही बना दिया. सबसे पाहिले छोटे छोटे
प्राणियों को शैतान की रचना बता कर
उनकी ह्त्या को जायज बना दिया. फिर
कुरबानी के बहाने पशुओं
की ह्त्या को धार्मिक कार्य बता दिया.
और आखिर में गैर मुस्लिमों को काफ़िर
बता कर उनकी ह्त्या को जायज
बता दिया और साथ ही इन अनपढ़
जाहिलो को लालच दे
दिया की जो इस्लाम न माने वो काफिर ,
और कुरआन काफिरों को क़त्ल करने
की इजाजत देता है, यानि जितने भी हिंदू
है जो इस्लाम नहीं मानते वो काफ़िर है ,
यदि उनको मार दिया जाए तो जन्नत
नसीब होगी जहाँ ७२ कुँवारी हूरे
उनका इन्तजार कर रही होंगी.
अब ये बेचारे मारकाट कर रहे है जन्नत में
जाकर 72 कुवारी हूरों का मज़ा लेने के
लिए । मरने के बाद जन्नत में खूबसूरत
जवान हूरें
मिलेंगी ,जो कभी बूढ़ी नहीं होंगी .उनकी
उम्र हमेशा १४-१५ साल
की रहेगी.जन्नत वाले किसी भी हूर से
शारीरिक सम्बन्ध बना सकेंगे. जन्नत में
हूरों के अलावा सुन्दर लडके
भी होंगे ,जिन्हें गिलमा कहा गया है .
और तो और ये भी कहा गया है
की जन्नत में जाने वाले जिहाद की काम
शक्ति अल्लाह 100
गुना बढा देगा ( जैसे अल्लाह ना हुआ
वियाग्रा का मैन्युफैक्चर हो गया )
दूसरी बात समाजह नहीं आती की ये
अल्लाह ने ऐसी कोनसी फेक्टरी खोल
राखी है जिनमे से इतनी सारी हुरे रोज़
निकलती है खैर अपने
को क्या करना समझ कर अपनी बात
आगे बढ़ाते है
इस्लाम में पवित्र योद्धाओ (आतंकियो)
को यौन-सुखों और भोगविलास के
असामान्य विशेषाधिकार दिए गए हैं।
यदि वे लड़ाई के मैदान में जीवित रह
जाते हैं तो उनके लिए गैर-
मुसलमानों की स्त्रियाँ रखैलों के रूप में
सुनिश्चित हो जाती हैं। लेकिन यदि वे
युद्ध के मैदान में मारे जाते हैं तो वे
हूरियों से भरे 'जन्नत' के अत्यन्त
विलासिता पूर्ण वातावरण में निश्चित रूप
से प्रवेश के अधिकारी हो जाते हैं।
अल्लाह को खुश करने के लिये कई जगह
मुर्तिपूजको तथा गैर-मुसलमानों की संहार
योजना में भाग लेने के बदले में यौन-
सुखों के
प्रलोभनों का वायदा किया जाता है जैसे
कि
यदि वह (आतंक फैलाने वाला ) युद्ध
भूमि की कठिन
परिस्थितियों मारा गया तो उसे 'जन्नत'
में उसकी प्रतीक्षा कर रहीं अनेक
हूरों के साथ असीमित भोगविलासों एवं
यौन-सुखों का आनंद मिलेगा, और
यदि वह जीवित बचा रहा तो उसको 'गैर-
ईमान वालों' के लूट के माल, जिसमें
कि उनकी स्त्रियाँ भी शामिल होंगी, में
हिस्सा मिलेगा।
इन आतंकियो को कितनी अच्छी तरह से
हूरो का लालच दे कर
बरगलाया जा रहा है हदीस
तिरमिज़ी खंड-2 पृ.(35-40) में दिए
गए हूरों के सौंदर्य के वर्णन इस प्रकार
है
हूर एक अत्यधिक सुंदर
युवा स्त्री होती है जिसका शरीर
पारदर्शी होता है। उसकी हड्डियों में
बहने वाला द्रव्य इसी प्रकार दिखाई
देता है जैसे रूबी और मोतियों के अंदर
की रेखाएँ दिखती हैं। वह एक
पारदर्शी सफेद गिलास में लाल शराब
की भाँति दिखाई देता है।
उसका रंग सफेद है, और साधारण
स्त्रियों की तरह शारीरिक कमियों जैसे
मासिक धर्म, रजोनिवृत्ति, मल व
मूत्रा विसर्जन, गर्भधारण
इत्यादि संबंधित विकारों से मुक्त
होती है।
प्रत्येक हूर किशोर वय
की कन्या होती है। उसके उरोज उन्नत,
गोल और बडे होते हैं जो झुके हुए नहीं हैं।
हूरें भव्य परिसरों वाले महलों में रहतीं हैं।
हूर यदि 'जन्नत' में अपने आवास से
पृथ्वी की ओर देखे तो सारा मार्ग
सुगंधित और प्रकाशित हो जाता है।
हूर का मुख दर्पण से भी अधिाक
चमकदार होता है, तथा उसके गाल में
कोई भी अपना प्रतिबिंब देख सकता है।
उसकी हड्डियों का द्रव्य ऑंखों से
दिखाई देता है।
प्रत्येक व्यक्ति जो 'जन्नत' में जाता है,
उसको 72 हूरें दी जाएँगी। जब वह
'जन्नत' में प्रवेश करता है, मरते समय
उसकी उम्र कुछ भी हो, वहाँ तीस वर्ष
का युवक हो जाएगा और उसकी आयु
आगे नहीं बढ़ेगी।
अब भई अब जब हूर इतनी खूब
होगीं तो कोई क्यो न अल्लाह के लिये
मरने को तैयार होगा, इन
आतंकियो का यही मकसद होता है
कि घरती पर उनके विलास के लिये
अल्लाह
द्वारा दिया गया मसौदा तो तैयार ही है
और जन्नत में भी हूरे उनका इन्जार कर
रही है। सोने पर सुहागा
हदीस तिरमिज़ी खंड-2 (पृ.138)
करती है कि ''जन्नत में एक पुरुष को एक
सौ पुरुषों के बराबर
कामशक्ति दी जाएगी'' :) जैसे जन्नत में
थोक के भाव
वियाग्रा की फैक्ट्री लगी है। क्या इसके
बाद भी यौन-सुखों के लिए आकर्षित
करने वाले प्रलोभनों और
प्रमाणों को देने की आवश्यकता रह
जाती है जो कि इस्लाम अपने
जिहादी योद्धाओ को प्रेरित करने के
लिए प्रस्तुत करता है ?
भाइयो आप खुद ही तय करो की अब ये
जिहाद धर्म युद्ध है या काम(सेक्स)
युद्ध
बाकी बाते अगली बार
जय श्री राम
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